World War 2 Ka Pura Itihaas – Full History World War 2

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World War 2 – आज हम बात करेंगे उस महायुद्ध की जिस की घटनाओं ने दुनिया के हर पहलू को बदल कर रख दिया जो इतिहास का एक कलंक है और खुद अपने आप में एक इतिहास है जिसके बारे में जानने के लिए दुनिया का हर इंसान उत्सुक रहता है जी हां आज हम बात करेंगे दूसरे विश्वयुद्ध की

World War 2 Ka Pura Itihaas - Full History World War 2दूसरे विश्वयुद्ध को ग्लोबल War या टोटल वॉर भी कहा जाता है वो इसलिए क्योंकि इस विश्वयुद्ध में सिर्फ सैनिक ही नहीं बल्कि देश के आम आदमी भी शामिल थे जब पहली वॉर होती थी तो सेना आपस में लड़ती थी लेकिन इस विश्वयुद्ध में सामान्य जनता को भी टारगेट किया गया था किसी भी देश में अपने दुश्मन देशों में घुसकर आम जनता पर गोले बरसाए थे उन पर बम फेंके थे और उन पर मिसाइलें दागी थी इसलिए इस विषय में कोई भी इंसान ऐसा नहीं था इस पर जान का खतरा ना हो

इसी कारण इसे टोटलवॉर ग्लोबल War कहा जाता है यह युद्ध 1939 से लेकर 1945 तक चला था और इस युद्ध में 2 मैन पावर थे एक था एग्जिट पावर जिसमें जर्मनी इटली जापान हंगेरी रोमानिया और बुल्गारिया जैसे देश शामिल थे जबकि दूसरी तरफ Allies Power के निशान थे इसमें यूएस ब्रिटेन फ्रांस यूएसएसआर ऑस्ट्रेलिया ब्राजील कनाडा चाइना डेनमार्क नॉर्वे पोलैंड देश शामिल थे

यहां पर याद रहे कि इटली पहले विश्वयुद्ध में Allies Power में था जबकि वह दूसरे विश्वयुद्ध में एग्जिट पावर में शामिल हो गया था दूसरे विश्वयुद्ध में उस वक्त की पृथ्वी की जनसंख्या के 3% लोग मारे गए थे करोड़ों लोग घायल हुए थे और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ था

जैसे कि पहले विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी पूरी तरह से घुटनों पर आ गया था और फ्रांस तथा ब्रिटेन ने विवादित Wersoles करार के जरिए जर्मन प्रजा की स्थिति बद से बदतर कर दी थी और जर्मन में रोष ओर आक्रोश पनपने लगा था उन प्रजा जनों में से एक था एडोल्फ हिटलर जिसने नाज़ी के जरिए जर्मनी की सत्ता हासिल की और दुश्मन देशों से बदला लेने का प्लान बनाया

हिटलर ने दुश्मन देशों के द्वारा हत्याय हुए जर्मन प्रदेशों को एक-एक कर वापस ले लिया और आखिरकार Germany का सबसे बड़ा भूभाग जो पोलैंड में था उस पर भी आक्रमण कर उसे ले लिया गया मगर हिटलर इतने से संतोष मानने वाला नहीं था और अब वह दुश्मन देशों को अपने दावे में करना चाहता था जिसके लिए उसने पोलैंड देश पर हमला कर दिया

दिन था 1 सितंबर 1939 समय सुबह के 4:45 और यह था दूसरे विश्वयुद्ध का आरंभ 1 सितंबर की सुबह 4:45 पर जर्मनी ने जिस महायुद्ध का आरंभ किया उसके कुछ ही घंटों में लगभग 1500000 जर्मन नाजी सैनिक पोलैंड के अंदर घुस गए और वह एक महीना होते होते तो पूरे Poland देश को जीत लिया

Poland पर हमला होने के हालात में मदद का वायदा देने वाले फ्रांस और ब्रिटेन भी इन हालात में कुछ ना कर सके पोलैंड को जीतने के बाद लगभग 6 महीने तक हिटलर शांत रहा उसने कोई भी प्रतिक्रिया कि नहीं लेकिन उसका अगला टारगेट फ्रांस और ब्रिटेन थे क्योंकि यही वह देश थे जो जर्मनी की दयनीय स्थिति के लिए जवाबदार थे और Wersoles करार के नायक

दूसरे विश्वयुद्ध में Adolf Hitler जर्मन सत्ता को पूरे Europe में फैलाना चाहता था और व्यक्ति ही सोच रखने वाला एक और तानाशाह इटली में पैदा हो गया था जो था मुसोलिनी मुसोलिनी इटालियन सत्ता फिर से यूरोप में खड़ी करना चाहता था और रोमन राज्य से हुकूमत वापस लाना चाहता था

तीसरी और पूर्व में जापान लड़ रहा था जापान एशिया में अपनी हुकूमत बनाना चाहता था और पूर्व तथा दक्षिण एशिया के देशों को जीत कर उन पर अपने हुकूमत कायम करना चाहता था तो इस तरह साम्राज्यवादी नीतियों को ध्यान में रख यह तीन देश विश्व युद्ध लड़ रहे थे

अब हिटलर बहुत ज्यादा ही महत्वाकांक्षी बन चुका था वह सभी देशों पर जर्मन राज लाना चाहता था फ्रांस और ब्रिटेन पर हमला करने के लिए उसे और ज्यादा शस्त्रों की और डिफेंस पावर की जरूरत थी इसलिए उसने फिलहाल वह हमला स्थगित रखा और उत्तरी यूरोप के एक स्केंदिनेवियर देश नॉर्वे पर हमला कर दिया

9 अप्रैल 1940 के दिन लगभग 15000 सैनिक 1000 फाइटर प्लेन और 28 सबमरींस को भेजकर नॉर्वे को जीत लिया और नॉर्वे और जर्मनी के बीच पड़ने वाले देश डेनमार्क को भी अपने ताबे में कर लिया इतना ही नहीं कुछ ही महीनों में तो नीदरलैंड तिलक चेंबर और बेल्जियम तीनों देशों पर बारी-बारी हमला कर जर्मनी में विलीन कर दिया

1940 का जून महीना आते-आते हिटलर को लगाकर अब उसके पास डिफेंस पावर के लिए उत्पादित शास्त्र पर्याप्त मात्रा में जमा हो गए हैं इसलिए 5 जून 1940 को हिटलर ने लगभग 1500000 नाजी सैनिकों को भेजकर फ्रांस पर आक्रमण कर दिया उस समय फ्रांस के पास 800000 सैनिक थे लेकिन उसके सामने 1500000 नाची सैनिक 2000 टेंक्स से फाइटर प्लेन थे जिसको उस वक्त हरा पाना France के बस में नहीं था और महेश 15 दिन होते होते तो फ्रांस का काम तमाम कर दिया

France और ब्रिटेन ने मिलकर जर्मनी को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी वह दिन आज भी हिटलर भुला नहीं था यहां पर इतिहास में अपने आप को फिर दोहराया हिटलर ने फ्रांस के वही कैंपिंग के जंगल में वही ट्रेन बुलवाई जिसमें लगभग 21 साल पहले फ्रांस और ब्रिटेन ने जर्मन सरकार से शरणागति पत्र पर दस्तखत करवाए थे

हिटलर ने आज इतने सालों बाद फिर से कैंपिंग के जंगलों में ट्रेन में बैठकर फ्रांस को शरणागति पत्र पर दस्तखत करवाए अब स्थिति यह थी कि जर्मन सेना लगभग पूरे यूरोप को अपने ताबे में ले चुकी थी बस अब सिर्फ एक ही देश बाकी था जो उनके सामने झुका नहीं था वह था द ग्रेट ब्रिटेन

हालांकि ब्रिटेन चारो और समुद्र से घिरा देश है इसलिए अब तक वह अवैध रह गया लेकिन 1940 में हिटलर ने समुद्री मार्ग से ब्रिटेन पर हमला करने की ठान ली लेकिन उसके इस विचार में बाधयुक्त बना उसका सेना अध्यक्ष हिटलर के सेनाध्यक्ष ने उस वक्त यह कहकर युद्ध को टाल दिया कि ब्रिटेन (United Kingdom) की वायु सेना बहुत मजबूत है और वह लोग हम पर समुद्र में हवाई हमला कर सकते हैं इसलिए हिटलर ने कुछ समय प्रतीक्षा की और अपने वायु सेना को और मजबूत बना लिया ताकि जब रिटर्न पर हमला करें तो जर्मन वायुसेना उस पर काउंटर अटैक कर सके

और कुछ ही महीनों बाद जर्मनी और ब्रिटेन के बीच घमासान युद्ध हुआ जिसे बैटल ऑफ ब्रिटेन भी कहा जाता है इस युद्ध में ब्रिटेन के 1000 और जर्मनी के लगभग 1800 फाइटर प्लेन इतना भूत हो गए महीनों तक चले बैटल ऑफ ब्रिटेन के बाद हिटलर का धैर्य टूट गया हालांकि आधे से ज्यादा यूरोप पर जर्मनी की हुकूमत थी और कुछ समय और हिटलर यह युद्ध (War) जारी रखता तो ब्रिटेन को आज नहीं तो कल हारना ही पड़ता

लेकिन कूटनीति में हिटलर इतना अच्छा नहीं था जितना वह राजनीति में था और वह न करने वाली तीन बड़ी गलतियां कर बैठा उसकी सबसे बड़ी एक भूल तो यह थी कि उसने ब्रिटेन के साथ युद्ध को स्थगित कर दिया और बेटन को बाद में हराने की सोचने के बाद वह फिलहाल यूरोप के अन्य देशों पर हुकूमत करने की सोचने लगा

Adolf Hitler की दूसरी और सबसे बड़ी अक्षम में गलती यह थी कि उसने रसिया के साथ बिना कोई कारण ही युद्ध छेड़ दिया रसिया के साथ युद्ध करने के लिए हिटलर ने 30 लाख सैनिक 7000 टेंक्स और 4000 फाइटर प्लेन रवाना किए

History Of World War 2

उस समय जर्मन नाची सैनिकों ने रशिया में घुसके की लेकिन बाद में वह रशियन सैनिकों के सामने और रसिया के ठंड मौसम के सामने नहीं टिक पाए और लगभग 909000 सैनिक मारे गए और रशियन सैनी जर्मन नाजी सैनिकों को देखते हुए जर्मनी की बॉर्डर तक आ गए

Adolf Hitler ने तीसरी गलती कि उसने बिना कोई वजह अमेरिका से युद्ध डिक्लेयर कर दिया जबकि विवादित Wersoles करार के वक्त और उससे पहले अमेरिका (United States) का रवैया जर्मनी के लिए शौक था और अमेरिका और जर्मनी के बीच कोई दुश्मनी भी नहीं थी जापान ने 7 दिसंबर 1941 के दिन अमेरिका के पर्वत पर हमला किया उसके चार ही दिन बाद हिटलर ने अमेरिका के साथ युद्ध की घोषणा कर दी

हिटलर ने शायद यह सोचा होगा कि अग्नि एशिया (Asia) में जापान ब्रिटेन के सामने लड़ रहा है जो जर्मनी का दुश्मन था इसलिए दुश्मन का दुश्मन दोस्त हुआ और जापान ने अमेरिका पर हमला कर दिया इस वजह से दोस्त का दुश्मन दुश्मन हुआ शायद इन समीकरणों के चलते हड़बड़ी में हिटलर ने अमेरिका के साथ युद्ध डिक्लेयर कर दिया लेकिन इसके परिणाम जर्मनी और हिटलर के लिए बहुत घातक साबित हुए

6 जून 1944 के दिन अमेरिका ब्रिटेन और दूसरे मित्र राष्ट्रों की सेना यूरोप में घुस गई और जर्मनी पर हमला कर दिया जिसमें कई नाजी सैनिक मारे गए और Wersoles करार में हुए अत्याचार का बदला लेने वाला जर्मनी फिर से घुटनों पर आ गया

इधर 1943 में जर्मनी का खात्मा बुलाने से पहले ही इटली (Italy) को अपने कब्जे में कर लिया और मुसोलिनी (Benito Mussolini) को हिरासत में ले लिया महीनों तक चले संग्राम में जर्मनी की पीछे हट हुई थी क्योंकि एक और पश्चिम की तरफ से अमेरिका ब्रिटेन और मित्र राष्ट्रों की सेनाएं जर्मनी पर हल्ला बोल रही थी जबकि दूसरी और पूर्व की तरफ रसिया की सेना राजधानी बर्लिन की ओर बढ़ रही थी इन हालात में अब जर्मनी की हार और तानाशाह हिटलर का अंत निश्चित था

हिटलर के अपने अंतिम दिन बर्लिन के सचिवालय के नीचे बने फ्यूरो बनकर कहे जाने वाले अपने आवास स्थान में गुजारे फ्यूरो नाम की यह बनकर ही तो बहुत मजबूत लेकिन बर्लिन पर हो रहे तोप के गोलों ने बनकर की नीव और उसकी छत को हिला दिया था हिटलर को अब अपना अंत करीब लग रहा था उसने कुछ सर्वोच्च नाचे अफसरों को और अपने करीबी लोगों को बुलाया जिसमें उस वक्त उसके साथ 26 लश्करी अवसर पर 31 चौकीदार थे

रशियन (Russia) का जो रीपोर्ट दस्तावेजों में दर्ज है उस रिपोर्ट के अनुसार हिटलर ने अपने करीबी लोगों से कहा कि मुझे किसी भी हाल में दुश्मनों के हाथ पकड़े नहीं जाना है वह एक-एक अफसरों को मिला लेकिन ज्यादा कुछ बातचीत नहीं की अब सब समझ गए थे कि आगे क्या होने वाला है

दूसरे दिन 3 तारीख 30 अप्रैल 1945 हिटलर के जीवन का यह आखिरी दिन था दोपहर को इवा ब्राउन (Eva Braun) के साथ उसने लंच किया लगभग 2:00 बजे के बाद भोजन समाप्त करते हुए वह दोनों एक कमरे में गए जिसके बाहर एक चौकीदार पहरा दे रहा था

कुछ समय बाद बनकर के उस कमरे में इवा ब्राउन ने सायनाइड की गोली खाली और हिटलर ने बौद्ध धर्म प्राण की अपनी ऑटोमेटिक पिस्तौल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर दी और इसी के साथ तानाशाही करके चैप्टर का अंत हो गया हालांकि हिटलर की मौत के बारे में यह सर्वमान्य रिपोर्ट के अनुसार घटित हुई घटनाओं का ब्यौरा है लेकिन हिटलर की मौत को आज भी एक मिस्ट्री माना चाहता है और उसके विषय में कई अलग-अलग रिपोर्ट अलग-अलग घटनाओं का जिक्र करती है

सच्चाई आखिर जो भी हो लेकिन उस वक्त हिटलर का अंत हो गया था और जर्मनी की पराजय इधर हिटलर की मौत और जर्मनी की हार के बाद यूरोप में तो लगभग दूसरा विश्वयुद्ध (World War 2) खत्म हो गया लेकिन एशिया में जापान अभी भी युद्ध लड़ रहा था जापान ने मित्र देशों के नाक में दम कर रखा था उसने अमेरिका का भी काफी नुकसान किया और कई अमेरिकन तथा चाइनीस डाकुओं को जीत लिया जापान उस वक्त फॉर्म में चल रहा था कि वह हार मानने के लिए तैयार नहीं था

और यहां पर मित्रों देश उसे हराकर किसी भी तरह युद्ध को खत्म करना चाहते थे इसलिए अमेरिका ने 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945, 2 दिन एक एक करके जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर एटॉमिक बम से हमला किया जिसमें हजारों जापानी निर्दोष लोग मारे गए

उसके साथ ही दूसरे विश्वयुद्ध का अंत हो गया लेकिन यहां पर सवाल यह है कि अमेरिका कई और तरीकों से भी जापान पर हमला कर उसे कंट्रोल में कर सकता था तो आखिर इतने भयानक एटॉमिक हमला करने की जरूरत क्या थी

इसके ऊपर अमेरिका की भी अपनी सफाई है अपने जवाब है खैर दूसरे विश्वयुद्ध का अंत चाहे जैसे भी हुआ बहुत ही बुरा हुआ इतनी खतरनाक युद्ध के बाद आखिरकार दुनिया को कुछ प्राप्त नहीं हुआ इस विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका और यूएसएसआर का फंडा विक्रम शुरू हुआ इस कॉल्ड बोर में तीसरे विश्वयुद्ध के संकेत भी दिखाई दे रहे थे लेकिन सुखद बात यह रही कि 1991 आते-आते कोल्ड War खत्म हो गया और दुनिया ने चैन की सांस ली

परंतु इस कोल्ड War (Cold War) के चलते अमेरिका और रसिया ने हजारों न्यूक्लियर वेपन खड़े कर दिए और न्यूक्लीयर से भी घातक हथियारों का उत्पादन किया और ना सिर्फ इन दो देशों ने बल्कि कई और देशों ने भी अपने आपको एडवांस कर दिया

तो दोस्तों ये थी World War 2 की जानकारी Hindi Me, आज के लिए इतना ही अगर आप को हमारी पोस्ट पसंद आई हो तो कमेंट जरूर करे धन्यवाद.

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